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سُوْرَةُ الْاِنْفِطَارِ

Surah Al-Infitar

The Cleaving

82 / 11419 आयतेंमक्की

अनुवाद: Suhel Farooq Khan & Saifur Rahman Nadwi

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتۡ (1)

जब आसमान तर्ख़ जाएगा

وَإِذَا ٱلۡكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتۡ (2)

और जब तारे झड़ पड़ेंगे

وَإِذَا ٱلۡبِحَارُ فُجِّرَتۡ (3)

और जब दरिया बह (कर एक दूसरे से मिल) जाएँगे

وَإِذَا ٱلۡقُبُورُ بُعۡثِرَتۡ (4)

और जब कब्रें उखाड़ दी जाएँगी

عَلِمَتۡ نَفۡسࣱ مَّا قَدَّمَتۡ وَأَخَّرَتۡ (5)

तब हर शख़्श को मालूम हो जाएगा कि उसने आगे क्या भेजा था और पीछे क्या छोड़ा था

يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡإِنسَٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلۡكَرِيمِ (6)

ऐ इन्सान तुम्हें अपने परवरदिगार के बारे में किस चीज़ ने धोका दिया

ٱلَّذِي خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ (7)

जिसने तुझे पैदा किया तो तुझे दुरूस्त बनाया और मुनासिब आज़ा दिए

فِيٓ أَيِّ صُورَةࣲ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ (8)

और जिस सूरत में उसने चाहा तेरे जोड़ बन्द मिलाए

كَلَّا بَلۡ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ (9)

हाँ बात ये है कि तुम लोग जज़ा (के दिन) को झुठलाते हो

وَإِنَّ عَلَيۡكُمۡ لَحَٰفِظِينَ (10)

हालॉकि तुम पर निगेहबान मुक़र्रर हैं

كِرَامࣰ ا كَٰتِبِينَ (11)

बुर्ज़ुग लोग (फरिश्ते सब बातों को) लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन)

يَعۡلَمُونَ مَا تَفۡعَلُونَ (12)

जो कुछ तुम करते हो वह सब जानते हैं

إِنَّ ٱلۡأَبۡرَارَ لَفِي نَعِيمࣲ‏ (13)

बेशक नेको कार (बेहिश्त की) नेअमतों में होंगे

وَإِنَّ ٱلۡفُجَّارَ لَفِي جَحِيمࣲ‏ (14)

और बदकार लोग यक़ीनन जहन्नुम में जज़ा के दिन

يَصۡلَوۡنَهَا يَوۡمَ ٱلدِّينِ (15)

उसी में झोंके जाएँगे

وَمَا هُمۡ عَنۡهَا بِغَآئِبِينَ (16)

और वह लोग उससे छुप न सकेंगे

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ (17)

और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है

ثُمَّ مَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ (18)

फिर तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या चीज़ है

يَوۡمَ لَا تَمۡلِكُ نَفۡسࣱ لِّنَفۡسࣲ شَيۡـࣰٔ اۖ وَٱلۡأَمۡرُ يَوۡمَئِذࣲ لِّلَّهِ (19)

उस दिन कोई शख़्श किसी शख़्श की भलाई न कर सकेगा और उस दिन हुक्म सिर्फ ख़ुदा ही का होगा