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سُوْرَةُ الْقَدْرِ

Surah Al-Qadr

The Power, Fate

97 / 1145 आयतेंमक्की

अनुवाद: Suhel Farooq Khan & Saifur Rahman Nadwi

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

إِنَّآ أَنزَلۡنَٰهُ فِي لَيۡلَةِ ٱلۡقَدۡرِ (1)

हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا لَيۡلَةُ ٱلۡقَدۡرِ (2)

और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है

لَيۡلَةُ ٱلۡقَدۡرِ خَيۡرࣱ مِّنۡ أَلۡفِ شَهۡرࣲ‏ (3)

शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है

تَنَزَّلُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذۡنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمۡرࣲ‏ (4)

इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं

سَلَٰمٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطۡلَعِ ٱلۡفَجۡرِ (5)

ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है