قُلۡ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ (1)
(ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगार
سُوْرَةُ النَّاسِ
Mankind
अनुवाद: Suhel Farooq Khan & Saifur Rahman Nadwi
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
قُلۡ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ (1)
(ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगार
مَلِكِ ٱلنَّاسِ (2)
लोगों के बादशाह
إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ (3)
लोगों के माबूद की (शैतानी)
مِن شَرِّ ٱلۡوَسۡوَاسِ ٱلۡخَنَّاسِ (4)
वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ
ٱلَّذِي يُوَسۡوِسُ فِي صُدُورِ ٱلنَّاسِ (5)
जो (ख़ुदा के नाम से) पीछे हट जाता है जो लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता है
مِنَ ٱلۡجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ (6)
जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से