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سُوْرَةُ التَّكَاثُرِ

Surah At-Takathur

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102 / 1148 आयतेंमक्की

अनुवाद: Suhel Farooq Khan & Saifur Rahman Nadwi

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

أَلۡهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ (1)

कुल व माल की बहुतायत ने तुम लोगों को ग़ाफ़िल रखा

حَتَّىٰ زُرۡتُمُ ٱلۡمَقَابِرَ (2)

यहाँ तक कि तुम लोगों ने कब्रें देखी (मर गए)

كَلَّا سَوۡفَ تَعۡلَمُونَ (3)

देखो तुमको अनक़रीब ही मालुम हो जाएगा

ثُمَّ كَلَّا سَوۡفَ تَعۡلَمُونَ (4)

फिर देखो तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा

كَلَّا لَوۡ تَعۡلَمُونَ عِلۡمَ ٱلۡيَقِينِ (5)

देखो अगर तुमको यक़ीनी तौर पर मालूम होता (तो हरगिज़ ग़ाफिल न होते)

لَتَرَوُنَّ ٱلۡجَحِيمَ (6)

तुम लोग ज़रूर दोज़ख़ को देखोगे

ثُمَّ لَتَرَوُنَّهَا عَيۡنَ ٱلۡيَقِينِ (7)

फिर तुम लोग यक़ीनी देखना देखोगे

ثُمَّ لَتُسۡـَٔلُنَّ يَوۡمَئِذٍ عَنِ ٱلنَّعِيمِ (8)

फिर तुमसे नेअमतों के बारें ज़रूर बाज़ पुर्स की जाएगी