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سُوْرَةُ الطَّارِقِ

Surah At-Tariq

The Morning Star

86 / 11417 आयतेंमक्की

अनुवाद: Suhel Farooq Khan & Saifur Rahman Nadwi

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ (1)

आसमान और रात को आने वाले की क़सम

وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ (2)

और तुमको क्या मालूम रात को आने वाला क्या है

ٱلنَّجۡمُ ٱلثَّاقِبُ (3)

(वह) चमकता हुआ तारा है

إِن كُلُّ نَفۡسࣲ لَّمَّا عَلَيۡهَا حَافِظࣱ‏ (4)

(इस बात की क़सम) कि कोई शख़्श ऐसा नहीं जिस पर निगेहबान मुक़र्रर नहीं

فَلۡيَنظُرِ ٱلۡإِنسَٰنُ مِمَّ خُلِقَ (5)

तो इन्सान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा हुआ हैं

خُلِقَ مِن مَّآءࣲ دَافِقࣲ‏ (6)

वह उछलते हुए पानी (मनी) से पैदा हुआ है

يَخۡرُجُ مِنۢ بَيۡنِ ٱلصُّلۡبِ وَٱلتَّرَآئِبِ (7)

जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच में से निकलता है

إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجۡعِهِۦ لَقَادِرࣱ‏ (8)

बेशक ख़ुदा उसके दोबारा (पैदा) करने पर ज़रूर कुदरत रखता है

يَوۡمَ تُبۡلَى ٱلسَّرَآئِرُ (9)

जिस दिन दिलों के भेद जाँचे जाएँगे

فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةࣲ وَلَا نَاصِرࣲ‏ (10)

तो (उस दिन) उसका न कुछ ज़ोर चलेगा और न कोई मददगार होगा

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجۡعِ (11)

चक्कर (खाने) वाले आसमान की क़सम

وَٱلۡأَرۡضِ ذَاتِ ٱلصَّدۡعِ (12)

और फटने वाली (ज़मीन की क़सम)

إِنَّهُۥ لَقَوۡلࣱ فَصۡلࣱ‏ (13)

बेशक ये क़ुरान क़ौले फ़ैसल है

وَمَا هُوَ بِٱلۡهَزۡلِ (14)

और लग़ो नहीं है

إِنَّهُمۡ يَكِيدُونَ كَيۡدࣰ ا (15)

बेशक ये कुफ्फ़ार अपनी तदबीर कर रहे हैं

وَأَكِيدُ كَيۡدࣰ ا (16)

और मैं अपनी तद्बीर कर रहा हूँ

فَمَهِّلِ ٱلۡكَٰفِرِينَ أَمۡهِلۡهُمۡ رُوَيۡدَۢا (17)

तो काफ़िरों को मोहलत दो बस उनको थोड़ी सी मोहलत दो